उपार्जन
        
उपार्जन कक्ष की गतिविधियां
    
भारत शासन द्वारा घोषित समर्थन मूल्य योजना के अन्तर्गत मध्यप्रदेश में कारर्पोरेशन द्वारा नोडल एजेन्सी का कार्य करते हुए गेहूं, धान एवं मोटा अनाज ( ज्वार, बाजरा एवं मक्का ) का उपार्जन किया जाता है । कारर्पोरेशन द्वारा 1993 से समर्थन मूल्य योजना के अन्तर्गत उक्त स्कंधों उपार्जन किया जा रहा है । वर्ष 1999-2000 से प्रदेश में विकेन्द्रीकृत गेहूं उपार्जन एवं वर्ष 2007-08 से विकेन्द्रीकृत धान उपार्जन कारर्पोरेशन द्वारा प्रारंभ किया गया है। उपार्जित मोटा अनाज का निराकरण सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं खुले बाजार में निविदा के माध्यम से भारतीय खाद्य निगम द्वारा किया जाता है । स्कंधवार विस्तृत विवरण निम्नानुसार है ।
    
गेहूं केन्द्र शासन द्वारा घोषित समर्थन मूल्य के अन्तर्गत राज्य शासन द्वारा प्रदेश में गेहूं उपार्जन का कार्य किया जा रहा है पूर्व में म.प्र. स्टेट सिविल सप्लाईज कारर्पोरेशन सम्पूर्ण प्रदेश में नोडल एजेन्सी का कार्य किया जाता था परन्तु प्रदेश में वर्ष दर वर्ष गेहूं की विपुल मात्रा उपार्जित होने के कारण राज्य शासन द्वारा भारतीय खाद्य निगम एवं सहकारी विपणन संघ को भी प्रदेश के कुछ क्षेत्र उपार्जन हेतु आवंटन किये गये । उक्तानुसार नियुक्त की गई उपार्जन एजेन्सियों द्वारा सहकारी एवं विपणन समितियों के माध्यम से प्रदेश में गेहूं का उपार्जन कराया जाता है । उक्त समितियों के साथ एजेंसिया द्वारा अनुबंध किया जाता है एवं नियमानुसार भारत शासन द्वारा घोषित हम्माली एवं कमीशन का भुगतान उन्हें किया जाता है । समितियों द्वारा उपार्जित गेहूं कारर्पोरेशन के निर्धारत संग्रहण केन्द्रों में या तो स्वयं के परिवहन माध्यम से अथवा कारर्पोरेशन के अधिकृत परिवहन कर्ताओं से परिवहन कराया जाता है ।समितियो से प्राप्त एफ..क्यू. गेहूं को वेयर हाउसिंग कारर्पोरेशन के गोदामों में भण्डारित कराया जाकर डब्ल्यू.एच.आर.प्राप्त की जाती है । निर्धारित उपार्जन अवधि 30 जून के पश्चात ही उपार्जित गेहूं को सार्वजनिक वितरण प्रणाली में प्रदाय किया जाता है । गेहूं के उपार्जन हेतु आवश्यक धन राशि की व्यवस्था रिजर्व बैंक आफ इण्डिया से साख सीमा प्राप्त कर करायी जाती है ।
    
धान गेहूं उपार्जन की भांति ही कारर्पोरेशन म.प्र.शासन द्वारा आवंटित क्षेत्रों में सहकारी समितियों के माध्यम से धान का उपार्जन भारत शासन द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर करती है । उपार्जित धान का संग्रहण वेयर हाउसिंग कारर्पोशन के गोदामों में कराया जाता है तदनुपरान्त धान की मिलिंग हेतु मिलर्स से आफर प्राप्त कर धान मिलिंग हेतु प्रदाय की जाती है । धान मिललिंग की दरें भारत शासन द्वारा घोषित की जाती है जिसके आधार पर मिलर्स को मिलिंग व्यय का भुगतान किया जाता है । प्रदेश में मिलिंग क्षमता कम होने के कारण भारत शासन द्वारा मिलिंग हेतु निर्धारित अवधि (सामान्यत: 30 जून तक )में मिलिंग पूर्ण करने में कठिनाई होती है । इसके अतिरिक्त राज्य शासन द्वारा प्रदेश में चावल हेतु लेव्ही नीति भी लागू रहती है। इसके अन्तर्गत मिलर्स को कस्टम मिलिंग के साथ संबद्व रहने के लिए यह आफर भी दिया जाता है कि वे कस्टम मिलिंग के बराबर लेव्ही के लिए चावल भी कारर्पोरेशन को प्रदाय कर सकता है । धान के उपार्जन हेतु आवश्यक धन राशि की व्यवस्था रिजर्व बैंक आफ इण्डिया से सायख सीमा प्राप्त कर करायी जाती है। मोटा अनाज भारत शासन द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर ही मोटे अनाजों (ज्वार, बाजरा, एवं मक्का ) का उपार्जन सम्पूर्ण प्रदेश में कारर्पोरेशन द्वारा किया जाता है उपार्जित मोटे अनाजों की मात्रा को चुनिंदा क्षेत्रों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में वितरण किया जाता है तथा शेष मात्रा भारतीय खाद्य निगम को सौंप दी जाती है जिसे उनके द्वारा निराकृत किया जाता है । उपार्जन की प्रक्रिया समितियों के मायम से ही गेहूं एवं धान उपार्जन के अनुसार ही की जाती है ।और जानने के लिए आगे पढ़े
  
site designed and maintained by Logiphilic solutions        मुख्य पृष्ठ । फीडबैक दें।अंगेजी वेबसाइट।संपर्क करें ।